कल रात बहुत उदास गुजरी। आज का दिन उससे भी ज़्यादा उदास है। मैं कहता नहीं लेकिन हॉस्पिटल्स मुझे अच्छे नहीं लगते। एक अजीब सा एहसास होता है उनके आसपास होने पर। एक अजीब सी महक एक अजीब सी कंपकंपी। मुझे कुछ भी इतना नहीं डराता जितना कि हॉस्पिटल्स।
जिंदगी कभी-कभी बहुत इम्तिहान लेती है। कुछ नहीं समझ आता कि कुछ लोगों को इतने
इम्तिहान क्यों देने होते हैं। शायद अच्छे लोग, सच, ईमानदारी, मोहब्बत, जिंदादिली मुश्किलों से इतनी घिरी हुयी
इसलिए होती है क्योंकि यह आसान नहीं। ये सब मुश्किल लफ्ज़ हैं। दुनिया आसान कामों
की तरफ ज़्यादा भागती है।
मैंने कभी अपने लिए दुआएं नहीं पढ़ीं और न ही कुछ माँगा है। मैं रब से बहुत दिनों
से नाराज़ चल रहा था। लेकिन कल रात को मैं अपना सर सज़दे में झुकाए बैठा रहा। मुझे
नहीं पता रब से नाराज़ होने के बदले क्या वो भी नाराज़ हो जाता है। मुझे ये भी नहीं
पता कि अब मेरे लिए कोई रब है भी या नहीं। लेकिन बहुत दिनों के बाद जाने कहाँ से उसे
लेकर एक विश्वास मेरे दिल के अन्दर घर कर गया है। शायद ये सज़दा उसी विश्वास के आगे
था। मैंने अपनी आँखे बंद करी और तभी एक मुस्कराहट मेरे सामने आ कर ठहर गयी। धीरे-धीरे
उसका चेहरा बनने लगा। फिर वो आँखे बनी जो मुस्कुरा रहीं थी। मैंने रब से इसी
मुस्कुराहट को मांग लिया।
हिमांशु जायसवाल

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