Follow Us @himanshujaiswal2711

बुधवार, जून 29, 2022

मेरी प्रार्थनाओं में तुम

 



नहीं मैं उसे बदलना नहीं चाहता। मैं ये भी नहीं चाहता कि वो जैसी थी वो वैसी हो जाए। वो जैसी है मुझे वैसी ही उतनी ही पसंद है जितनी पहले थी। मुझे पता है वक़्त और हालात इन्सान को तबियत से बदल देते हैं। लेकिन वो ये नहीं है। यह उसका सच नहीं है। और वो ऐसे कभी दिल से खुश नहीं रहेगी। उसने अपने दिल को इतनी गहराई में महफ़ूज़ कर दिया है, जिसके ऊपर इतनी सतहें हैं कि उन्हें पार करके मोहब्बत की एक रौशनी भी नहीं पहुँच पा रही है। प्यार ही तो है जो हर दर्द को भगा सकता है, प्यार ही तो ज़िन्दगी को फिर से सजाता है। 


शायद एक बात उसकी सही है। सब वक़्त के साथ अपने आप सही हो जायेगा। लेकिन क्या वक़्त के साथ सब सही होता है या फिर हमें वैसे ही रहने की आदत पड़ जाती है? मैं उसे किसी तकलीफ़ में नहीं देख सकता। उसका हर एक दुःख मुझे अन्दर से परेशान करता है। बीते दिनों मुझे एक बात पता लगी है हम जैसे बाहर से होते हैं, जैसा बाहर से दिखते हैं मजबूत, हंसमुख हमेशा वैसे अन्दर से नहीं होते। अन्दर से हम बहुत डरे हुए, बहुत ख़ामोश, एक घबराए सहमे बच्चे जैसे भी हो सकते हैं जिसके लिए सबकुछ अस्थायी है। कुछ भी हो सकता है जैसा डर है।

 

वो मेरी प्रार्थनाओं में हमेशा से है और हमेशा रहेगी। कोई अगर किसी रब से अपने रब की खुशियाँ मांगे तो उसे मिल जाती होंगी न? कहीं रब नाराज़ तो नहीं हो जाते होंगे कि मेरे आलावा तुम्हारा कोई और रब कैसे हो सकता है।


-हिमांशु जायसवाल

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

आपकी प्रतिक्रियाओं का स्वागत है...