प्रेम का पहचाना जाना
हम जीवन भर प्रेम को खोजते हैं.. जब ये ख़ुद हमारे सामने आता है तो अपनी आँखे मूँद लेते हैं.. खोजे जाने या पाये जाने से ज़्यादा ज़रूरी है, प्रेम का पहचाना जाना... - हिमांशु जायसवाल
सपनों वाला ब्लॉग
हम जीवन भर प्रेम को खोजते हैं.. जब ये ख़ुद हमारे सामने आता है तो अपनी आँखे मूँद लेते हैं.. खोजे जाने या पाये जाने से ज़्यादा ज़रूरी है, प्रेम का पहचाना जाना... - हिमांशु जायसवाल
दिसंबर का महीना साल का
सबसे खूबसूरत महीना होता है.. और शायद प्रेम का भी.. दिसंबर बेपनाह नींदे लेकर आता
है और नींदे प्रेम की सबसे खूबसूरत नेमतें होती हैं.. दिसंबर अब मुझे नींद का कम
और जाग का ज़्यादा लगता है.. शायद किसी का जाना ऐसी तमाम बातों का धीरे-धीरे चले
जाना है जो हम पहले माना करते थे...
बहुत याद करता हूँ तो याद आता है कि उसे गुलाबी रँग
पसंद था तो मुझे पीला... उसे कपास के फूल पसंद थे तो मुझे जैसमीन... उसे हर दिन, हर तारीख, और
वो घड़ी याद रहती जब हम मिला करते थे और मुझे सिर्फ़ उसकी बातें! इन्हीं अकेली पड़ी
हुयी हथेलियों को थाम कर उसने एक दिन मुझसे कहा था - सुनो अब हम हमेशा साथ रहेंगे!
और तब एक कतरा मेरी आँखों के अंदर ही ढुलक कर रह गया था जिसे मेरी मुस्कुराहट और
शर्म ने छुपा लिया था! उस वाक्य का मतलब मैं अभी भी समझने की कोशिश कर रहा हूँ!
जब वो गई तो अपने साथ उन सारी तारीखों को ले गई
लेकिन मेरे पास छोड़ गई अपनी तमाम बातें..
अलगनी पर पड़े सूखे कपड़े उतारने के बहाने मैंने छत
पर उससे घंटों बातें की हैं! दिसंबर का सूरज मेरे प्रेम का गवाह रहा है वह प्रेम
जिसका मेरे रोम-रोम से अब विस्मरण हो चुका है! दिसंबर का आना मेरे लिए किसी शोकगीत
के सुनने जैसा है! वह गीत जो अब मैं कभी सुनना नहीं चाहता!
- हिमांशु जायसवाल
मैंने कब कहा
कोई मेरे साथ चले
चाहा जरुर!
अक्सर दरख्तों के लिये
जूते सिलवा लाया
और उनके पास खडा रहा
वे अपनी हरीयाली
अपने फूल फूल पर इतराते
अपनी चिडियों में उलझे रहे
मैं आगे बढ गया
अपने पैरों को
उनकी तरह
जडों में नहीं बदल पाया
यह जानते हुए भी
कि आगे बढना
निरंतर कुछ खोते जाना
और अकेले होते जाना है
मैं यहाँ तक आ गया हूँ
जहाँ दरख्तों की लंबी छायाएं
मुझे घेरे हुए हैं......
किसी साथ के
या डूबते सूरज के कारण
मुझे नहीं मालूम
मुझे
और आगे जाना है
कोई मेरे साथ चले
मैंने कब कहा
चाहा जरुर!