ट्रेन का सफर
हिमांशु जायसवाल
सितंबर 30, 2018
0 Comments
मुझे ट्रेन का सफर अब अकेले अच्छा नहीं
लगता l मेरे लिए ट्रेन का सफर बहुत मुश्किल भरा रहता है l इसलिए
नहीं की यात्रा लम्बी होती है या फिर स्लीपर क्लास में Uncomfortable फील होता है... कितने अनजान चेहरे होते हैं और सबकी अपनी अपनी कोई कहानी l मुझे कहानियों में हमेशा से रुचि रहती है.. जैसे मेरा ही हिस्सा कोई हो
इनमें और फिर इतनी कहानियों के बीच सफर करना मुझे भाता ही है l नहीं अच्छा लगता तो बस तब जब कोई छोटा हाथ मज़बूरी में मेरी तरफ बढ़ता है
और मैं सिवाय बेबसी के उन्हें कुछ दे नहीं पाता l उसी पल
सैकड़ो सवाल मुझे घेर लेते हैं l क्योंकि कुछ रुपए दे देने
भर से मेरा मन अच्छा नहीं होता l इसलिए कभी हाथ जेब की तरफ
नहीं बढ़ता मेरा l क्योंकि आज कुछ सिक्के दे कर भले ही मैं
दो मिनट के लिए अपने मन की गरीबी दूर जरूर कर लूँ, खुद की
नज़र में अच्छा भले ही बन जाऊँ लेकिन उनकी मज़बूरी, उनकी
गरीबी इससे दूर नहीं होगी इसलिए मैं सिक्के निकाल कर उन मज़बूरी में फैले हुए
हाथों की तरफ नहीं बढ़ाता l बल्कि अपने मन में बसा
लेता हूँ वो हर एक तस्वीर उन फैले हुए हाथों की जो परत दर परत मेरे मन में जमा
होती रहती है l
आज भी
एक छोटा सा लड़का शायद उम्र यही कोई 5-6 साल की होगी मेरे डिब्बे में
आया l वही गैलेरी में कुछ कर तब दिखाने लगा l उसके साथ उसकी उससे भी छोटी और एक बड़ी बहन थी l छोटी
बहन के गाल पर एक काला टीका लगा हुआ था l शायद उसकी माँ ने
उसे किसी नज़र से बचाने के लिए लगाया हो और बड़ी बहन एक छोटी सी ढोलक बजा रही थी
जिस पर लड़का कुछ कलाबाज़ी कर के कर तब दिखा रहा था उसके बाद वो अपने हाथ फैलाए
मेरी तरफ भी आया l मैंने उससे उसकी माँ के बारे में पूछा
उसके पापा के बारे में पूछा l उसने बताया कि माँ उसकी ट्रेन
में ही है और पापा घर पर और ज्यादा पूछने पर वो वहाँ से चला गया मुझसे बिना रुपए
लिए ही l मुझे बुरा लगा l
लेकिन
मुझे कुछ चंद सिक्के ही नहीं अपना वक़्त भी देना है उन्हे ताकि वो ट्रेन में आते
जाते छोटे बच्चे जो ना जाने किस मज़बूरी को अपनी पीठ पर बांधे अपना बचपन स्याह कर
चुके हैं l मैं उन्हे उनका बचपन लौटाना चाहता हूँ... कैसे होगा, कब होगा मुझे कुछ नहीं पता लेकिन बस होगा इतना जानता हूँ l
ट्रेन
के सफर से अगर कुछ बहुत अच्छी यादें जुड़ी हुयी हैं तो वहीं ये तकलीफ देने वाले
लेकिन हर पल महसूस होने वाले मज़बूरियों के दृश्य भी l इसलिए
ट्रेन का सफर अब अकेले अच्छा नहीं लगता l


